घर पर अच्छी आवाज़ वाला पॉडकास्ट रिकॉर्ड करने के लिए हैरानी की हद तक कम चीज़ें चाहिए: एक अलग माइक्रोफ़ोन, क्लोज़्ड-बैक हेडफ़ोन, माइक को स्थिर रखने वाला स्टैंड और ऐसा कमरा जो गूँजे नहीं। बस इतने से ही आप लैपटॉप के बिल्ट-इन माइक से बनी ज़्यादातर रिकॉर्डिंग से बेहतर सुनाई देंगे। यहाँ बताया गया है कि पहले क्या ख़रीदें, क्या रुक सकता है, और शुरुआत में किस पर पैसा ख़र्च करना फ़ायदेमंद नहीं।
ज़रूरी चीज़ें
एक अलग माइक्रोफ़ोन
यही ख़रीद आपके नतीजे सबसे ज़्यादा बदलती है। आपके पास दो रास्ते हैं:
- USB: सीधे कंप्यूटर में लगता है, और कुछ नहीं चाहिए, और शुरुआत का सबसे व्यावहारिक तरीक़ा है।
- XLR: इसके लिए ऑडियो इंटरफ़ेस चाहिए, लेकिन आगे बढ़ने और बाद में पुर्ज़े बदलने की ज़्यादा गुंजाइश देता है।
अगर यह आपका पहला पॉडकास्ट है, तो एक अच्छा डायनामिक USB माइक्रोफ़ोन लगभग हमेशा क़ीमत और नतीजे के बीच सबसे अच्छा संतुलन है। डायनामिक माइक कंडेंसर माइक की तुलना में बैकग्राउंड शोर कम पकड़ते हैं, जो एक आम कमरे में रिकॉर्ड करते समय बहुत मायने रखता है। दोनों विकल्पों की विस्तार से तुलना हम USB या XLR माइक्रोफ़ोन में करते हैं।
क्लोज़्ड-बैक हेडफ़ोन
ये दो काम करते हैं: रिकॉर्डिंग के दौरान आप ख़ुद को सुन पाते हैं, और आपके गेस्ट की आवाज़ स्पीकर से निकलकर वापस आपके माइक में नहीं जाती। क्लोज़्ड-बैक मॉडल ओपन-बैक की तुलना में आवाज़ को बेहतर अलग रखते हैं। महँगे होना ज़रूरी नहीं; इतने आरामदायक होने चाहिए कि लगातार एक घंटा पहन सकें।
स्टैंड या बूम आर्म
माइक्रोफ़ोन हाथ में पकड़ने से झटके और हैंडलिंग का शोर आता है। टेबल वाला ट्राइपॉड ठीक काम करता है; बूम आर्म बेहतर है क्योंकि इससे आप माइक को बिना रुकावट मुँह के पास ला सकते हैं, और यह मेज़ के कुछ कंपन भी सोख लेता है।
छोटे अपग्रेड जो बड़ा फ़र्क़ डालते हैं
- पॉप फ़िल्टर या फ़ोम विंडस्क्रीन: «प» और «ब» से निकलने वाले हवा के झोंके कम करता है।
- पर्याप्त लंबी केबल: ताकि आप कंप्यूटर की ओर झुकने के बजाय आराम से बैठ सकें।
- दरी या कंबल: मेज़ पर या फ़र्श पर, आवाज़ को इधर-उधर टकराने से रोकने में मदद करता है।
आपका कमरा भी उतना ही मायने रखता है जितना माइक
ख़ाली कमरे में सख़्त दीवारों के बीच रखा महँगा माइक्रोफ़ोन, फ़र्नीचर से भरे कमरे में रखे सस्ते माइक से ख़राब सुनाई देता है। घर के ऑडियो का दुश्मन नंबर एक इको है। कुछ झटपट आइडिया:
- सबसे ज़्यादा मुलायम चीज़ों वाले कमरे में रिकॉर्ड करें: बिस्तर, पर्दों और कपड़ों वाला बेडरूम आम तौर पर ख़ाली ड्रॉइंग रूम से बेहतर चलता है।
- ठीक पीछे कोनों और नंगी दीवारों से बचें।
- पंखा, AC और पास में रखा फ़्रिज बंद कर दें।
अगर और गहराई में जाना है, तो हमारे पास बिना किसी तोड़-फोड़ के कमरे का इको कम करने की गाइड है।
अगर आप दूसरों के साथ रिकॉर्ड कर रहे हैं?
हर व्यक्ति का अपना माइक्रोफ़ोन चाहिए। अगर सब एक ही जगह हैं, तो कई XLR इनपुट वाला इंटरफ़ेस समस्या हल कर देता है। अगर आप अलग-अलग शहरों में हैं, तो हर कोई अपने माइक से घर से रिकॉर्ड करता है और आप इंटरनेट से जुड़ते हैं।
रिमोट बातचीत में ज़रूरी यह है कि हर गेस्ट के पास कम से कम हेडफ़ोन और लैपटॉप के बिल्ट-इन से अलग एक माइक्रोफ़ोन हो। आप सबको वीडियो कॉल पर या ब्राउज़र के वर्चुअल स्टूडियो में इकट्ठा कर सकते हैं, जहाँ हर व्यक्ति अपने अवतार के रूप में टेबल पर बैठा दिखता है।
झटपट टेबल: कहाँ से शुरू करें
| बजट | क्या ख़रीदें |
|---|---|
| बहुत तंग | डायनामिक USB माइक + पहले से मौजूद हेडफ़ोन |
| मध्यम | USB या XLR माइक + आसान इंटरफ़ेस + बूम आर्म + क्लोज़्ड-बैक हेडफ़ोन |
| बढ़ने की गुंजाइश | हर व्यक्ति के लिए एक XLR माइक + कई इनपुट वाला इंटरफ़ेस + कमरे का बेसिक ट्रीटमेंट |
अभी किस पर ख़र्च न करें
- महँगे अकूस्टिक पैनल: पहले पर्दे, कुशन और दरी आज़माएँ।
- बड़े मिक्सिंग कंसोल: अगर आप बस एक-दो लोग हैं, तो इसकी ज़रूरत नहीं।
- सिनेमा कैमरे: अगर वीडियो चाहिए, तो जो है उससे शुरू करें या अवतार इस्तेमाल करें। असल में मायने रखता है कि ऑडियो अच्छा सुनाई दे।
माइक्रोफ़ोन कैसे रखें
ग़लत जगह रखा गया शानदार गियर भी मदद नहीं करेगा। तीन नियम जो लगभग हर माइक्रोफ़ोन के साथ काम करते हैं:
- दूरी: मुँह से एक मुट्ठी से एक बित्ते तक। ज़्यादा दूर हों तो कमरा घुस आता है; ज़्यादा पास हों तो आवाज़ भारी हो जाती है और «प» फटते हैं।
- एंगल: माइक को मुँह की ओर, लेकिन थोड़ा तिरछा रखें, ताकि हवा सीधी न टकराए।
- एक जैसी दूरी: पूरे एपिसोड में वही दूरी रखें। अगर आप बहुत हिलेंगे, तो आवाज़ ऊपर-नीचे होगी।
«प» और «ब» से भरा कोई वाक्य बोलकर टेस्ट रिकॉर्डिंग करें («पीली पतंग पर बैठा बबलू बड़ा बोलता है») और तब तक बदलते रहें जब तक साफ़ न सुनाई दे।
ख़रीदारी की चेकलिस्ट
- अलग माइक्रोफ़ोन (USB या XLR)
- क्लोज़्ड-बैक हेडफ़ोन
- स्टैंड या बूम आर्म
- पॉप फ़िल्टर
- ढेर सारी मुलायम सतहों वाली एक शांत जगह
इतने के साथ आप अपना पहला एपिसोड रिकॉर्ड करने के लिए तैयार हैं। और अगर आपके पॉडकास्ट में दूसरे शहरों के गेस्ट आते हैं, तो आप उन्हें सीधे ब्राउज़र से एक 3D स्टूडियो में इकट्ठा कर सकते हैं: अपना स्टूडियो मुफ़्त बनाएँ।
कुछ भी ख़रीदने से पहले आसपास पूछ लें: बहुत से लोगों के पास दराज़ में कोई माइक्रोफ़ोन या हेडफ़ोन पड़ा होता है जिसे वे अब इस्तेमाल नहीं करते। दो-तीन एपिसोड उधार के गियर से आज़माने से पता चल जाता है कि अपना पैसा लगाने से पहले आपको असल में क्या चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या सिर्फ़ फ़ोन से पॉडकास्ट रिकॉर्ड कर सकते हैं?
हाँ, और शुरुआत के लिए यह ठीक है। फ़ोन में लगने वाला एक लेपल (कॉलर) माइक नतीजे बहुत सुधार देता है। जैसे-जैसे पॉडकास्ट बढ़े, एक अलग माइक्रोफ़ोन आपको ज़्यादा क्वालिटी और कंट्रोल देगा।
कंडेंसर माइक्रोफ़ोन बेहतर है या डायनामिक?
घर पर रिकॉर्डिंग के लिए डायनामिक माइक आम तौर पर बेहतर विकल्प है क्योंकि यह बैकग्राउंड शोर और इको कम पकड़ता है। कंडेंसर माइक अच्छी तरह ट्रीट किए गए कमरों में चमकते हैं।
क्या ऑडियो इंटरफ़ेस चाहिए?
सिर्फ़ तब जब आप XLR माइक्रोफ़ोन इस्तेमाल कर रहे हों। USB माइक्रोफ़ोन में कंप्यूटर से सीधे जुड़ने के लिए ज़रूरी सब कुछ पहले से होता है।
स्रोत
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